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मुनिश्री समत्व सागर महाराज

मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज

अमेरिका की चमक, दमक, 20 लाख का पैकेज नहीं, महावीर का मार्ग रास आया 🦚मोक्षमार्ग भी अजब है अगर मन में गुरु के प्रति विश्वास और मोक्षमार्ग पर चलने का दृढ़ निश्चय आ जाए तो अमेरिका जैसे देश की चमक दमक, लाखों के पैकेज वाली नौकरी, गीत-संगीत सुनने का शौक, लहरों पर तैरने और स्केटिंग…

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आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की पूजा

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की पूजा
गुरु पूजा का शास्त्र में देवोल्लिखित विधान ।
ब्रम्हा विष्णु महेश से ऊँचा गुरु का स्थान ।।
मुनि विद्यासागर जैसा कोई संत न होगा दूजा ।
मन वच तन से हम करते इन श्रीचरणों की पूजा ।।

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आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की बुंदेली पूजन

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की बुंदेली पूजन अरे मोरे गुरुवर विद्यासागर, सब जन पूजत हैं तुमखों, हम सोई पूजन खों आये, हम सोई पूजन खों आये, तारो गुरु झट्टई हमको, मोरे हृदय आन विराजो, मोरे हृदय आन विराजो, हाथ जोर के टेरत हैं, और बाट जई हेर रहे हम, और बाट जई हेर रहे हम, हंस…

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आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी की आरती

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी की आरती विद्यासागर की, गुणआगर की, शुभ मंगल दीप सजाय के।आज उतारूँ आरतिया…..॥1॥ मल्लप्पा श्री, श्रीमती के गर्भ विषैं गुरु आये।ग्राम सदलगा जन्म लिया है, सबजन मंगल गाये॥गुरु जी सब जन मंगल गाये,न रागी की, द्वेषी की, शुभ मंगल दीप सजाय के।आज उतारूँ आरतिया…..॥2॥ गुरुवर पाँच महाव्रत धारी, आतम ब्रह्म…

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परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज पूजन

परम पूज्य 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज पूजन
लेखक : श्री अरुण कुमार जैन बंडा, मध्य प्रदेश, भारत

श्री विद्यासागर के चरणों में झुका रहा अपना माथा।
जिनके जीवन की हर चर्यावन पडी स्वयं ही नवगाथा।।
जैनागम का वह सुधा कलश जो बिखराते हैं गली-गली।
जिनके दर्शन को पाकर के खिलती मुरझायी हृदय कली।।

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SHRI CHANDA PRABHU CHALISA (DEHRA TIJARA) / श्री चन्द्र प्रभु चालीसा (देहरा तिजारा)

SHRI CHANDA PRABHU CHALISA (DEHRA TIJARA) / श्री चन्द्र प्रभु चालीसा (देहरा तिजारा) वीतराग सर्वज्ञ जिन, जिनवाणी को ध्याय |लिखने का साहस करूँ, चालीसा सिर-नाय ||१|| देहरे के श्री चंद्र को, पूजौं मन-वच-काय ||ऋद्धि-सिद्धि मंगल करें, विघ्न दूर हो जाय ||२|| जय श्री चंद्र दया के सागर, देहरेवाले ज्ञान-उजागर ||३||शांति-छवि मूरति अति-प्यारी, भेष-दिगम्बर धारा भारी…

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VAIRAGYA BHAVNA : SHRI VRAZNAABHI CHAKRAVARTI / वैराग्य भावना : श्री वज्रनाभि चक्रवर्ती

VAIRAGYA BHAVNA : SHRI VRAZNAABHI CHAKRAVARTI / वैराग्य भावना : श्री वज्रनाभि चक्रवर्ती भाषाकार : कविश्री भूधरदास (दोहा) बीज राख फल भोगवे, ज्यों किसान जग-माँहिं |त्यों चक्री-नृप सुख करे, धर्म विसारे नाहिं ||१|| (जोगीरासा व नरेन्द्र छन्द) इहविधि राज करे नरनायक, भोगे पुण्य-विशालो |सुख-सागर में रमत निरंतर, जात न जान्यो कालो ||एक दिवस शुभ कर्म-संजोगे,…

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